Friday, 3 January 2020

70 हजार करोड़ के विमान सौदे में पी. चिदंबरम से छह घंटे चली ईडी की पूछताछ


वर्तन निदेशालय (ईडी) ने यूपीए के शासनकाल में एयर इंडिया के लिए 111 विमानों की खरीद के सौदे से जुड़ी वित्तीय अनियमितता के मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से छह घंटे तक पूछताछ की है। यह सौदा 70 हजार करोड़ रुपये का था और ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। 
करोड़ों रुपये के कथित उड्डयन घोटाले के अलावा अंतरराष्ट्रीय एअरलाइनों के लिए हवाई स्लॉट निर्धारित करने में अनियमितताओं के चलते एअर इंडिया को हुए नुकसान की जांच चल रही है। संर्क करने पर चिदंबरम ने पूछताछ के बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट के तहत चिदंबरम का बयान दर्ज किया गया है। ईडी ने पहले भी अगस्त 2019 में चिदंबरम से पूछताछ की कोशिश की थी लेकिन तब वह सीबीआई की हिरासत में थे। चिदंबरम पिछले साल 4 दिसंबर को तिहाड़ जेल से 106 दिनों के बाद रिहा हुए थे।

क्या है मामला?
तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम मंत्रियों के उस समूह के प्रमुख थे जिसने वर्ष 2009 में विमानों की खरीद का फैसला लिया था। मूल प्रस्ताव एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के लिए 28 विमान खरीदने का था लेकिन सरकार ने एयरबस 68 विमान एंयर इंडिया के लिए और 43 विमान इंडियन एयरलाइंस के लिए खरीदने का फैसला लिया था।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी नोटिंग में लिखा था कि जब एयरलाइंस गंभीर संकट में थी तब यह फैसला बर्बादी की ओर बढ़ाने वाला है। सीबीआई इस मामले में विमान खरीद के अलावा तीन अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है- बिना किसी विमर्श के एयर इंडिया द्वारा विमानों को लीज पर देना, जिन रूटों पर प्रॉफिट था वे रूट्स निजी एयरलाइंस को दिए जाने और एयर इंडिया व इंडियन एयरलाइंस का विलय।
पिछले साल सितंबर में सीबीआई ने लॉबीइस्ट दीपक तलवार के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। सीबीआई का दावा है कि प्रॉफिट वाले रूट्स सरकारी एयरलाइंस से निजी एयरलाइंस को दिलवाने के लिए हुई बातचीत में दीपक तलवार ने बिचौलिये की भूमिका निभाई थी।

Monday, 23 December 2019

151 नगर निकाय चुनावों का फैसला आज, 8 बजे से काउंटिंग


छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के लिए आज निर्णायक दिन है। 21 दिसंबर को हुए मतदान के परिणाम आज आएंगे। वोटों की काउंटिंग के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। छत्तीगढ़ के 10 नगर निगम, 38 नगर पालिका और 103 नगर पंचायत में हुए मतदान के आज परिणाम सामने आएंगे, जिसकी गिनती आज सुबह आठ बजे से होगी। बैलेट पेपर से मतदान होने के कारण निकायों के परिणाम में देरी की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि राज्य में पार्षद के लिए दो हजार 840 पद पर मतदान हुआ है। 10 हजार 161 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला आज यानी मंगलवार की शाम तक हो जाएगा।

राज्य के कुल 151 नगरीय निकाय, जिनमें 10 नगर निगम, 38 नगर पालिका और 103 नगर पंचायत में औसतन 78.73 फीसदी मतदान हुआ। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों की आज होने होने वाली मतगणना की सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। राज्य निवार्चन आयुक्त कायार्लय से मिली जानकारी के अनुसार 151 निकायों के साथ ही दो नगरीय निकायों में हुए उप चुनाव की मतगणना सुबह आठ बजे शुरू होंगी। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गणना की जायेगी उसके बाद मतपेटियों को खोला जायेंगा।

Chhattisgarh Urban Body Election Results 2019:

राज्य में 151 नगरीय निकायों में 2840 वार्ड पार्षद और उपनिवार्चन वाले दो नगरीय निकायों में तीन पार्षद पद के लिए गत 21 दिसम्बर को मतदान हुआ था। मतदान में इस बार ईवीएम का इस्तेमाल नही किया गया है और मत पत्र से मतदान करवाया गया है। मतपत्रों से मतदान होने के कारण मतगणना में ज्यादा समय लगने की संभावना है, पर देर शाम तक सभी परिणाम मिल जाने की उम्मीद है।  

प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों के कुल छह वार्डो में निर्विरोध निवार्चन हुआ है। उम्मीदवार की मृत्यु के कारण एक वार्ड में निवार्चन स्थगित किया गया है। सभी अभ्यर्थियों द्वारा नामांकन वापस ले लेने से रिक्त रह गए वार्डों की संख्या दो है। वहीं कुल तीन वार्डों में एक भी नामांकन पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। 

नगरीय निकायों में मतपत्र और मतपेटियों से होने वाले मतदान के लिए कुल पांच हजार 427 मतदान केन्द्र बनाए गए थे। 151 आम चुनाव वाले नगरीय निकायों में 2840 वार्ड पार्षद और उपनिवार्चन वाले दो नगरीय निकायों में तीन पार्षद पद के लिए उम्मीदवारों का चुनावी भविष्य मतपेटियों में बन्द है। मतदान के लिए कुल पांच हजार 427 मतदान केन्द्रों में से पांच हजार 399 मतदान केन्द्र आम निवार्चन वाले नगरीय निकायों में और उपनिवार्चन के लिए 28 मतदान केन्द्र स्थापित किए गए थे।

मौसम अपडेट: कंपकंपा देने वाली सर्दी से अभी राहत नहीं, कश्मीर-उत्तराखंड में जारी रहेगी बर्फबारी


अगर आप ठंड से राहत पाने का इंतजार कर रहे हैं, तो फिलहाल ऐसे संकेत नहीं मिल रहे हैं। कंपकंपा देने वाली सर्दी से जूझ रहे उत्तर भारत को फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं। लोगों को इस सप्ताह के आखिरी दो दिनों में और भी भीषण सर्दी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। इस बार कड़ाके की सर्दी, क्रिसमस और नए साल में खलल डाल सकती है।

मौसम विभाग ने दिल्ली एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के अधिकांश इलाकों और उत्तरी राजस्थान में 28 और 29 दिसंबर को पारा चार डिग्री सेल्सियस तक गिरने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।  इन दो दिनों में शीत लहर चलने की भी संभावना जताई है। सर्दी के इस मौसम में मानकों के मुताबिक शीत लहर की स्थिति पहली बार उत्पन्न होगी। मौसम विभाग की उत्तर क्षेत्रीय पूर्वानुमान इकाई के प्रमुख वैज्ञानिक डा. कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि हिमालय क्षेत्र में जारी बर्फबारी से अगले दो तीन दिनों में सर्दी में इजाफा होने की संभावना है। इसके कारण उत्तर के मैदानी इलाकों में आगामी शनिवार और रविवार को शीत लहर की स्थिति देखने को मिलेगी। उत्तर भारत में सप्ताहांत के दौरान न्यूनतम तापमान चार डिग्री और अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है।

कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल में बर्फबारी जारी रहेगी
डा. श्रीवास्तव ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इस सप्ताह भी बर्फबारी बरकरार रह सकती है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत के उत्तरी इलाकों की ओर आने वाली ठंडी हवाएं सर्दी में इजाफा कर रही हैं। मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब सहित उत्तर और उत्तर पश्चिमी इलाकों में 28 दिसंबर से रात के तापमान में दो से चार डिग्री तक की गिरावट आने का अनुमान है। 

यूपी के मुरादाबाद में ठंड का कहर जारी
सोमवार को नगर के लोग बर्फीली हवा के कहर से ठिठुर उठे। दिन भर धूप नहीं निकलने से दिन का अधिकतम तापमान लुढ़ककर 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह सर्दी के इस मौसम में दिन का सबसे कम तापमान रहा। रात का न्यूनतम तापमान और घटने से ठंड के तेवर और प्रचंड हो गए।

पिछले दस दिनों का अधिकतम तापमान
तारीख           अधिकतम तापमान         सामान्य से कितना कम
23 दिसंबर        14.3                                      7
22 दिसंबर        14.6                                      7
21 दिसंबर        18.0                                    4.5
20 दिसंबर        17.5                                       5
19 दिसंबर        15                                          7
18 दिसंबर        18                                          5
17 दिसंबर        12.2                                      10
16 दिसंबर        12.9                                      10
15 दिसंबर        19.8                                        3
14 दिसंबर        19.2                                        4

Wednesday, 11 December 2019

राज्यसभा की हरी झंडी के बाद, सुप्रीम कोर्ट रोड को हिट करने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक


राज्यसभा में नौ घंटे की लंबी बहस बुधवार को विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक या सीएबी के पारित होने में समाप्त हुई, जिसमें सदन ने पक्ष में 125 और पक्ष में 99 वोट डाले। चूंकि नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर व्यापारिक बहस आगे बढ़ी, राज्यसभा टीवी के ब्लैकआउट के साथ कई फ्लैशप्वाइंट थे, क्योंकि विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह को झटका दिया, जब वह विपक्ष और विपक्ष के बीच एक मौखिक द्वंद्व में नागरिकता विधेयक पेश कर रहे थे। ट्रेजरी बेंच। 

 जबकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने नागरिकता विधेयक को रद्द करने के लिए नाजी जर्मनी के कानूनों के साथ समानताएं व्यक्त कीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 दिसंबर को "ऐतिहासिक दिन" के रूप में वर्णित किया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिया है कि पार्टी वकील अभिषेक मनु सिंघवी के साथ सीएबी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है, क्योंकि कानून को निकट भविष्य में कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी क्योंकि यह भारत की संवैधानिकता के खिलाफ है। विपक्ष ने नागरिकता विधेयक को, जो भाजपा के प्रमुख चुनावी वादों का हिस्सा था, को "असंवैधानिक", "विभाजनकारी" और "राष्ट्र के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर हमला" करार दिया। चूंकि केंद्र सरकार ने जनता दल (यूनाइटेड) (6) AIADMK (11) बीजू जनता दल (7) और शिरोमणि अकाली दल के सहयोग से नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पक्ष में 125 वोट खींच लिए, विपक्ष ने शिवसेना के फैसले का स्वागत किया मतदान करने से बचें। सोनिया गांधी ने इस कदम को "भारत के संविधान में काला दिन" बताया क्योंकि राज्यसभा ने नागरिकता विधेयक को कानून बनने के करीब ले जाया गया। 

"नागरिकता संशोधन विधेयक का पारित होना भारत के बहुलवाद पर संकीर्णतावादी और बड़ी ताकतों की जीत को दर्शाता है। यह बुनियादी रूप से भारत के विचार को चुनौती देता है कि हमारे पूर्वजों ने इसके लिए लड़ाई लड़ी और इसके स्थान पर एक विकृत, विकृत और विभाजित भारत का निर्माण किया जहां धर्म होगा। सोनिया गांधी ने कहा कि राष्ट्रवाद का निर्धारक बनें।

राज्यसभा में बोलते हुए, चिदंबरम ने कहा कि विधेयक भारत की आत्मा पर हमला है, जो सत्तारूढ़ पार्टी "अपने हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए" कर रही है। चिदंबरम ने यह भी कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और यह "असंवैधानिक कानून" सुप्रीम कोर्ट के सामने परीक्षण के लिए आने पर कोई मौका नहीं देगा। राज्यसभा ने 40 वक्ताओं और 43 संशोधनों के प्रस्तावों के साथ एक गर्म बहस देखी। सभी संशोधनों को सदन ने खारिज कर दिया। कांग्रेस, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने यह सुनिश्चित करने के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया कि उन्होंने अपने पक्ष में अंकगणित पर काम किया है। 

राजनीतिक रूप से चार्ज किए गए जवाब में अमित शाह ने सदन को बताया कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक का भारत के मुस्लिम समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि वे किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होंगे। कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए चिदंबरम और कपिल सिब्बल को अपना वक्ता बनाया। चिदंबरम ने CAB की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून की अदालत के सामने कोई भी आधार नहीं होगा। अमित शाह की टिप्पणी पर पुनर्विचार करते हुए कि कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी पाकिस्तानी नेताओं से मेल खाती है, कपिल सिब्बल ने कहा, "आपने पहले बहुत ही आपत्तिजनक बयान दिया था। कोई भी भारतीय मुस्लिम आपसे नहीं डरता। 

न तो मैं और न ही देश का कोई अन्य नागरिक आपसे डरता है।" केवल देश के संविधान से डरते हैं। ” डेरेक ओ'ब्रायन, जो कांग्रेस के आनंद शर्मा के बाद दूसरे वक्ता थे, ने सरकार पर "झाँसा, जुमला और झूट" का आरोप लगाया। हालांकि, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन को आश्वासन दिया कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक कानून मंत्रालय द्वारा प्रमाणित किया गया था और कानून की अदालत का परीक्षण करेगा। असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा की खबरों पर राज्यसभा में चर्चा हुई, अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों को अपनी पहचान और अस्तित्व की चिंता करने की जरूरत नहीं है। 

 अमित शाह ने लगातार सरकारों पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि असम समझौता केवल कागज पर था और यह 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की बागडोर संभालने के बाद ही किया गया था।

Sunday, 8 December 2019

रघुराम राजन सैयस: देश की सीमा में शासन है,


RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि देश की विकास दर धीमी है। एक पत्रिका में, उन्होंने लिखा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अस्वस्थता के संकेत हैं। देश में सत्ता का बहुत अधिक केंद्रीकरण हुआ है, जहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पास सभी शक्तियाँ हैं। उनके मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं है।

राजन ने कहा, “यह समझने के लिए कि क्या गलत हुआ, हमें पहले मौजूदा सरकार में एक केंद्रीकृत प्रणाली के साथ शुरुआत करने की जरूरत है। पीएमओ में न केवल बड़े फैसले लिए जाते हैं, बल्कि विचारों और योजनाओं को प्रधानमंत्री के आसपास के लोगों के एक छोटे समूह द्वारा भी तय किया जाता है। यह विधि पार्टी के राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे के लिए उपयुक्त है क्योंकि कई लोग आर्थिक मामलों के जानकार हैं। यह विधि आर्थिक सुधारों के संदर्भ में प्रभावी नहीं है, क्योंकि सबसे ऊपर के लोगों को विषय का व्यवस्थित ज्ञान नहीं है। वे समझते हैं कि अर्थव्यवस्था राज्यों के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर कैसे काम करती है। "

अध्‍ययन के दौरान खबरें प्रकाशित नहीं होंगी: राजन 

राजन ने कहा, “आर्थिक मंदी की समस्या को दूर करने के लिए, मोदी सरकार को पहले इस समस्या को स्वीकार करना चाहिए। प्रत्येक आंतरिक या बाहरी आलोचना को एक राजनीतिक ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करने से इसका समाधान नहीं होगा। उन्हें समस्या को अस्थायी मानने की आदत बदलनी चाहिए। सरकार को यह समझना होगा कि बुरी खबर या किसी असुविधाजनक सर्वेक्षण को दबाने से स्थिति नहीं बदलेगी। भारत ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था के इस संकट को और गहरा करेगा। कोई भी मुद्दा तभी काम करता है जब पीएमओ उसका ध्यान रखे। जब पीएमओ का ध्यान किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित होता है, तो पूरी प्रक्रिया रुक जाती है। "

5 ट्रायल डोलर इकोनॉमी टार्गेट डिफिकल्ट 

“निर्माण, रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्र गहरी मुसीबत में हैं। इसकी वजह से कर्ज देने वाली गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां भी मुश्किल में हैं। बैंकों के फंसे हुए ऋणों के कारण, नए ऋण देने की गति रुक ​​गई है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की संपत्ति की समीक्षा करते हुए, उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट और घरेलू ऋण बढ़ रहा है और वित्तीय क्षेत्र के कुछ हिस्से गहरी परेशानी में हैं। "

“युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है, यह विद्रोह की स्थिति पैदा कर रहा है। घरेलू व्यापारी निवेश नहीं कर रहे हैं। निवेश में ठहराव सबसे मजबूत संकेत है कि सिस्टम में कुछ गड़बड़ है। " राजन ने भूमि अधिग्रहण, श्रम कानूनों, स्थिर करों और नियामक प्रणाली के सुधार पर जोर दिया। इसके साथ ही, दिवालिया घोषित करने, बिजली की कीमत में तेजी लाने, दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बचाने के लिए कहा कि किसानों की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच है। 

राजन ने कहा कि सरकार को फिलहाल मध्यम वर्ग के लिए व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती करने से बचना चाहिए। यह ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की मदद करने के लिए 'मनरेगा' जैसी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन प्रदान करेगा। "2024 तक $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर साल कम से कम 8 से 9% की वृद्धि दर की आवश्यकता होगी, जो इस समय वास्तविकता से बहुत दूर है।" 

“भले ही कुछ समस्याएं विरासत में मिली हों, सरकार को सत्ता में साढ़े पांच साल बाद उन्हें हल करना होगा। हमें बड़े पैमाने पर नए सुधार लाने चाहिए। साथ ही, प्रशासन को नियंत्रित करने के तरीकों को बदलना चाहिए। "

मिनिमम गोवर्नमेंट, वे मिस्टेरस्टर्ड मैक्सिमम गवर्नेंस 

राजन ने कहा, '' मोदी सरकार न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन का नारा देकर सत्ता में आई। वे अक्सर इस नारे को गलत समझते हैं। इसका मतलब यह था कि सरकार अधिक कुशलता से काम करेगी, लोगों और निजी क्षेत्र के लिए अधिक काम नहीं छोड़ा जाएगा। स्वचालन के लिए सरकार द्वारा की गई पहलों के कारण, लोगों को सब्सिडी या सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे खाते में मिल रहा है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और ऐसे कई क्षेत्रों में सरकार की भूमिका कम होने के बजाय बढ़ गई है।

विकास के लिए प्रतिष्ठित आर्थिक संदर्भ 

मंदी की मार झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने और विकसित करने के लिए, राजन ने पूंजी, भूमि और श्रम को बेहतर बनाने पर जोर दिया, बाजारों के उदारीकरण के माध्यम से निवेश बढ़ाया। जुलाई से सितंबर की तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 4.5% के 6 साल के निचले स्तर पर आ गई।

अमेरिका में दोहा में तालिबान के साथ परिणाम: स्रोत


अमेरिका ने शनिवार को कतर में तालिबान के साथ बातचीत फिर से शुरू की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लगभग तीन महीने पहले अचानक राजनयिक प्रयासों को रोक दिया। 

इस साल सितंबर में, उन्होंने तालिबान और संयुक्त राज्य अमेरिका को समझौते के करीब आते देखा, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा गारंटी के बदले में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी हुई। हालांकि, उसी महीने में, ट्रम्प ने तालिबान प्रतिनिधियों को कैंप डेविड में गोपनीय वार्ता के लिए दिए गए निमंत्रण को अचानक वापस ले लिया, जिसमें साल भर का प्रयास मृत था।

अमेरिकी सैनिक को मारने के बाद उसने यह कदम उठाया। अमेरिकी सूत्र ने कहा, "अमेरिका आज फिर से दोहा में बातचीत में शामिल होगा।" चर्चा के केंद्र में हिंसा को कम करना होगा, जो अंतर-अफगान वार्ता और युद्धविराम के लिए रास्ता बनाएगा। A ट्रम्प, जो पिछले सप्ताह अफगानिस्तान में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की आश्चर्यजनक यात्रा पर थे, ने कहा कि तालिबान समझौता करना चाहता था। अमेरिकी वार्ताकार जालमा खलीलज़ाद ने हाल के सप्ताहों में पाकिस्तान सहित अफगानिस्तान शांति वार्ता के हितधारकों का दौरा किया। 

अमेरिका ने क़तार में तालिबान के साथ भर्ती किए 

उन्होंने हाल ही में बंधकों की अदला-बदली की व्यवस्था की। हालांकि, तालिबान ने तीन साल के लिए बंधक अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई शिक्षाविदों को रिहा कर दिया। तालिबान ने अब तक अफगान सरकार से बात करने से इनकार कर दिया है। वह काबुल की सरकार को अवैध मानता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने युद्धविराम का समर्थन किया जो अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गालिया द्वारा चिंता व्यक्त किए जाने के बाद तालिबान के साथ काबुल की वार्ता से पहले एक बड़ी प्राथमिकता है। 

 शांति के पुन: प्रयास की घोषणा करते हुए, अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को कहा। इसके अलावा, “राजदूत खलीलजाद तालिबान को फिर से शामिल करेगा और विभिन्न चरणों पर चर्चा करेगा जिससे एक अंतर-अफगान वार्ता होगी। इसके अलावा, और युद्ध का एक शांतिपूर्ण समाधान, खतसौर पर हिंसा। और अंततः संघर्ष विराम के लिए सहमत हुए। 

यह माना जाता है कि समझौते में दो केंद्र बिंदु होंगे। साथ ही, अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और चरमपंथियों की जिहादियों की रक्षा न करने की प्रतिबद्धता। करीब 18 साल पहले अफगानिस्तान में अमेरिकी घुसपैठ का मुख्य कारण अलकायदा से तालिबान का संबंध था। 

हालांकि, तालिबान के साथ सत्ता की साझेदारी। साथ ही, भारत और पाकिस्तान जैसी क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका और गनी सरकार का भविष्य। हालांकि, ऐसे मुद्दे हैं जिन पर शिकंजा फंस सकता है।    

मैं एक फिल्म देखने के लिए 200 दिनों तक नहीं एक एंकर नहीं हूँ: एक कुमार


अक्षय कुमार का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि लोग 200 दिन फिल्मों की शूटिंग में क्यों बिताते हैं। दरअसल, अक्षय शुक्रवार को हिंदुस्तान टाइम्स के लीडरशिप समिट में बोल रहे थे, क्यों वह एक उत्सव के बजाय एक साल में कई फिल्में रिलीज़ करते हैं। वह इस कार्यक्रम में 'गुड न्यूज' की अपनी सह-अभिनेत्री करीना कपूर के साथ पहुंचे। अक्षय ने कहा, मैं ऐसा अभिनेता नहीं हूं जो 2 महीने तक किसी होटल में रुकता है और पूरी तरह से चरित्र में ढल जाता है। मैं यह नहीं कर सकता यह सिर्फ अभिनय है। यह नहीं जानते कि लोग इतना भार क्यों उठाते हैं। ”

‘इसे अपने चार्टर को पूरा करने के लिए एक दिन निकालता है’

अक्षय आगे कहते हैं, “मुझे निर्देशक के निर्देश के अनुसार अपने चरित्र को समझने और बाकी सब करने में एक दिन लगता है। मुझे समझ नहीं आया कि लोगों को ऐसी फिल्म की शूटिंग के लिए 200 दिन क्यों लगते हैं। "" असंभव "(हॉलीवुड मूवी) की शूटिंग 55 दिनों में हुई थी। क्या हम इससे कुछ बड़ा बना रहे हैं? " 

'एक वर्ष में 8 MOVIES कर सकते हैं’ 

एक साल में एक फिल्म लाने के सवाल पर, अक्षय ने कहा, “मैं फिल्म को 40 दिनों में खत्म करता हूं। मैं एक साल में 4 फिल्में करता हूं। इसका मतलब है कि मैं 205 दिन फ्री हूं। मैं एक साल में 8 फिल्में कर सकता हूं। लेकिन मुझे दर्शकों पर दया आती है। " 

करीना के साथ सेट पर खेले गए एकेएसके 

बातचीत के दौरान, अक्षय और करीना ने अपने कार्य समीकरण के बारे में बात की। करीना ने इस रहस्य को साझा करते हुए कहा, "जब अक्षय अपनी एक फिल्म का पहला शॉट दे रहे थे, तो मैं कैमरे के पीछे था।" और उसके साथ खेलते हैं। आज वह मेरी नायिका है। ”करीना ने यह कहकर पुष्टि की,“ मेरे लिए, अक्षय के साथ घर आना एक घर वापसी जैसा है। वह परिवार के सदस्य की तरह है। जब मैं उसके साथ काम करता हूं, तो मैं पूरी तरह से तनावमुक्त हो जाता हूं। ”

करीना अक्साय के लिए पूरी तरह से चाहती हैं 

करीना ने उन अभिनेत्रियों के बारे में बताया, जिन्होंने इवेंट में अपना प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया है। वे कहती हैं, “अनुष्का (शर्मा) और दीपिका (पादुकोण) शादीशुदा होने के बावजूद निर्माता बन गई हैं। समय परिवर्तनशील है। अगर मैं निर्माता बनना चाहता हूं, तो मेरा फैसला पैसे के बारे में नहीं होगा। यह वह फिल्में होंगी। ”मैं क्या करना चाहूंगा। जहां तक ​​फीस की बात है, तो मैं उतना ही भुगतान करना चाहूंगा जितना अक्षय को मिलता है। " 

अक्षय ने करीना के विचार पर हां कहा और कहा, “मैं एक फिल्म बनाने के लिए तैयार हूं जिसमें करीना हीरो की भूमिका निभाएंगी और 50-50 की भागीदार होंगी। वह फीस नहीं लेगा, लेकिन लाभ में 50-50 का भागीदार होगा। "